Friday, March 13, 2009

जिस नूर से हम को प्यार था.....

जिस नूर से हम को प्यार था ,
वोह शोख चंद तम्कीन था ,

सरेआम हम हुए बे -आबरू ,
यह जख्म भी नमकीन था ,

पर आज मेरी कब्र पे ,
उस शोख के दो आँशु गिरे ,

वोह घाव फ़िर तिल मिल उठे ,
कल को जख्म -ये -महीन था ,

ना मोह्हबत का एहसास होता ....

ना मोह्हबत का एहसास होता ,
ना जख्म होते दुनिया में ,

यह कह कर हस देते है हम ,
ना कहते तो रोते दुनिया में ,

क्यूँ हमसे कहते हो शराब छोड़ दो...

क्यूँ हमसे कहते हो शराब छोड़ दो , इस दोस्त से बढकर दोस्त ना पाओगे ,

जो बात कहने को ज़माने भर से हो डरते ,मैखाने में उसको ही बार बार दोहराओगे ,
बड़े फिरते हो वाईज बने इस खूबसूरत रंग के ,कोई तजुर्बा इश्क का इस शायर पे फर्मोगे ,

दुआ करते है तुम्हारा दिल न टूटे कभी ,टूटा तो तुम भी मैखाने में ,साथी से जाम मिलाओगे,

शैलांश...

Thursday, March 12, 2009

मुलाक़ात......

यह कविता मैंने एक तस्वीर को देखते हुए लिखी थी ....और भगवान् से एक मुलाकात कर आया...उम्मीद है पसंद आएगी ....

बैठा दिया यूँ सोचने , दे दो नक्श मेरे सामने ,

जैसे मैं बिखरा रंगों में,या हूँ निकला कश्ती थामने

कैसी कहानी मै लिखूं ,हूँ मैं कवि किस काम का ,

कविता है वोह नाम की ,हासिल न हो जिसमे अंजाम सा ,

है दिख यह कस्ती मुझे ,समंदर से है जो लड़ रही ,

पानी में जैसे आग हो,नीचे से जैसे तप रही,

मैं देखता हूँ ख़ुद को वह ,नीला जहाँ सा दिख रहा ,

पानी में नाव ऐसे बह रही ,मस्ती में जैसे फूल खिल रहा ,

फ़िर लड़ रहा था दो पल बाद मैं ,ख़ुद की कलि के टूटने से,

सागर भी था प्यार में,चाहा था मुझको मेरे डूबने में ,

कुछ ही पलों के दौरान मैं ,अतीत के सौ पन्ने पड़े ,

सोचा की क्या क्या है काम बाकी ,है कुछ लोग मेरे बल पर खड़े ,

उस पल हुआ कुछ अँधेरा वहां ,फ़िर रंगीन आसमान हो गया ,

दिखने लगा वो इन्द्रधनुष ,जैसे मैं मौत में खो गया ,

वोह रौशनी थी मुझे कह रही ,इस तूफ़ान तू स्वीकार कर ,

लड़ बढ़ और काट पानी को ,इस दर्द को तू पार कर ,

क्या होगा जो तू हारेगा ,पहले ही मौत क्यूँ खोजता है ,

एक बार मिल जायें दर्द ,कोई बात नही ,कोशिश ये तू सौ बार कर ,

शायद तुझे दिख रहा ,किनारा न अब कोई दूर है,

ताक़त तुझे है दे रहा प्यार उसका ,माथे का जिसके तू सिन्दूर है ,

कैसे बताऊँ उस रौशनी को ,मुझको किनारा कोई न दिख रहा ,

झुकती सी जा रही ये नाव ये,हूँ हलचल में पानी की मिल रहा ,

न संभल रही ताक़त से अब ,रक्षा की ये ताबीज किन,

बाँधी जिसे उसे सिन्दूर ने है ,है पानी में मिलती हर चीज सी ,

कोशिश को कर ,क्यूँ थक रहा ,देखा है कल बस भगवान् ने ,

कह दूसरी साँस से तू ,आ पहली को तू थामने ,

अब अंत के करीब हूँ ,जैसे इश्वर से हूँ मैं मिल गया ,

था आशमा ना कभी इतना थमा , जितना था उस दिन दिख रहा ,

पानी अब बिल्कुल शांत है ,किनारा भी है आस पास में ,

कश्ती बयानी उस रौशनी में ,पानी जलाया उस आग ने ,

एक पल में है अब आँख खुली, पाता हूँ, लिखता ख़ुद को लोगों में,

चेहरे से सबके खो गया मैं ,या खो गया मैं अपनी सोचों में ,

मैं शुक्रिया तुम्हारा करता हूँ ,तुमने है सच वो बात की ,

मर के तो सब उससे मिलते है ,जी कर के मैंने मुलाक़ात की ,

जीतना और हारना कविता में ,बेईमानी की बात लगती है ,

लिखते ही उससे मिल गया ,अब कविता ये मेरी सजती है ,

.शशि'दिल से ....

Wednesday, March 4, 2009

होती ना अगर आपसे से मोहब्बत हमको .....

होती ना अगर आपसे से मोहब्बत हमको ,तो रंग ना उस दुनिया के हम कहानियो में समेटते ।
ना शायरी से यूँ दोस्ती करते ,न पन्नो पे ख्वाब बिखेरते ।
गर इनकार ना तुम करते उस दिन तो ,न यूँ पैमानों से हम मचलते ,
सहनाई पे तेरी न यूँ गीत गाते ,न ख़ुद ही ख़ुद की शायरी के शब्दों से यूँ खेलते ।
शैलांश ....

काश उनकी नज़र.....

काश उनकी नज़र भी कभी बेखबर सी ,कमरे के मेरे आईने पे गिरती ,
तो उनके हुस्न के नूर से हम भी खुदा का दीदार पाते .
टूट जाए काश आईना भी उस पल ही ,केशू के उनके छू जाने से ,
ज़माना तो तरसता है एक नश्क़ को उनके ,टुकडो में हम हज़ार पाते ।

शशि 'दिल से ....

Wednesday, February 25, 2009

रोशनी की तलाश में ....

रोशनी की तलाश में है दर बदर भटका ये दिल ,

पर छुपा है सुकून ख़ुद उस की ही गहराई में ।

हमसफ़र तो छोड़ गया है रस्ते में ही ,

अब तो भागते है ख़ुद की परछाई से ।

आहत भर से लगता है वोह आयें है,

नूर लेकर जिंदगी भर का ,

पर खुली आँख हंशी ख्वाब से जब ,

देखा रोती थी वोह भी चुपचाप तन्हाई में .

शशि दिल से ...

यूँ दोस्ती हुई.....

हम चल रहे थे साथ ,वो चल रहे थे साथ .यूँ दोस्ती हुई ,
थी मंजिले करीब ,पर था दूरियों का एहसास .यूँ दोस्ती हुई ,
डर लग रहा था जुदाई का ,कर रहे थे मिन्नतें उस प्यार से ,
कुछ कदम पे ही था मोड़ उनका ,पर हो गई बरसात ,यूँ दोस्ती हुई,

तुम होती तो शाम होती....

तेरे ख्याल भर से महकी है ये महफ़िल ,की तुम आते तो शाम होती ,
नूर आता ,शमा जलती ,सुकून मिलता इस सूने मन को ,पास आओ ,थाम लो ,फ़ना कर दो इस दर्द से हम को ,
आसुओ से भीगी आँख एक ख्वाब है सजोती ,की तुम होती तो शाम होती .

तेरे जाने की तकलीफ तो है इस दिल को ,पर ये प्यार एक आस जगा देता है ,ये जाम तो बस एक रंग का मोहताज है ,नशा तो तेरे छूने पे ही मज़ा देता है ,
अश्को के मोती को काश तुम ,पैमानों संग पिरोती ,की तुम होती तो शाम होती ।

शशि दिल से...

ओ प्रिया ...

तुझे छूने को दिल करे ,तुझे पाने को दिल करे ,जो बात मेरे दिल में छिपी है ,वोह बताने को दिल करे ,ओ प्रिया ...ओ प्रिया ...
ये शब् नशीली ,ये शाम महकी ,तेरे ख्यालों से है ,तेरे लबों पे एक गीत लिख दूँ ,मेरे सवालों में है ,
तेरे हर एक नश्क़ को ,दुल्हन बनने का दिल करे ,जो बात मेरे दिल में छुपी है ,वो बताने का दिल करे ,ओ प्रिया ...ओ प्रिया ...
मैं सोचता हूँ वो कल हमारा ,जब साए करीब थे ,हम तुम में खोये ,तुम हम में खोये , नूर -ऐ -हशीन में ,
उस नूर के लाल से ,मांग सजाने का दिल करे ,जो बात मेंरे दिल में छुपी है ,वो बताने का दिल करे ,
ओ प्रिया ...ओ प्रिया ...

शशि दिल से .....

आपको अपना है मान लिया.....

आपको अपना है मान लिया बिन रिश्तों की पहचान के ,
ख्वाहिस सब हो जाएँगी पूरी मिल जाओ एक बार हमारे आरमान से ।
आंशुओं की बात है तो देख लो हम्हारे दिल में ,
हर मोती है झलकता बस आपके ही नाम से ।
शैल

Tuesday, February 24, 2009

टूटे दर्द पर दर्द अनोखा ......

मुझे ना मतलब दुनिया से अब ,हुई दीवानी भूल गई जग ,
तेरी जोगन बनके झूमू ,बिन सावन झूलों पे घूमू ,
मुझे कहे केरी हर साँस दीवानी ,यौवन ने यह लिखी कहानी ,
आँख को मूंदू तुझको पाऊं ,बिठा सखी से पाठ पड़ाऊँ,

मुझे लगा ये रोग अनोखा ,नीम हकीम लगे सब धोका,
बिस्तर पे जल्दी से जाऊं,तकिये को हर बात बताऊँ ,
दर्पण से करूँ शर्म मैं ,लगे फरक न जियन मरण में,
एक पैर की पायल भूलूं ,गर्म कडाई हाथ से छूलूं ,

बहकी बहकी बात करूँ मैं ,दर्पण से हर रात लडू मैं
बिन बारिश छतरी ले नाचूं, थाम नब्ज़ ये रोग ये नापूं ,
जाऊं पनघट घूम के नगरी ,लौटूं घर ले खाली गगरी ,
समझ से अपनी पार चली मैं ,एक कातिल पे दिल हार चली मैं

पर उसको मेरी फिक्र नही है ,उसका दिलबर और कहीं है ,
टूटे दिल मैं आँख भिगोऊँ ,हर पल उसकी आंस है जोहूँ ,
पलक सूज गई रात को जग जग ,पर उन्हें पड़े न फर्क न मतलब ,

हो गए आज तिन बरस रो रो के, आज भी उनको हर बात में सोचे,
मैं पागल मैं दीवानी मीरा ,कृष्ण नाम की थाम मंजीरा ,
अपनी बीती बात बताऊँ ,लिखे शशि गान ये गाऊँ,
हमने बस यह इश्क में सीखा ,टूटे दर्द पर दर्द अनोखा .

'शशि' दिल से ....


Sunday, January 18, 2009

लागा चुनरी में दाग ...


लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे.....
लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे.....

मैं बांवरी तेरी ,तेरे प्यार में,
झूमी बांगो में दिल हार के,
कोई फूल था महका बांगो में,
बची खुशबु को मिटाऊँ कैसे,
लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे.....

तू पागल मुझे कर गया जालिम,
इश्क में तेरे हार गया दिल,
हट गई चादर की वोह सिलवट ,
दिल की सिलवट हटाऊँ कैसे
लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे.....

थे पैमाने कुछ कुछ छलके,
दिए घाव दिलो ने हलके,
भर गए जख्म जिगर के ऊपर,
जख्म जिगर के दिखाऊँ कैसे,
लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे.....

बीता बचपन याद है आये,
बोले बाबुल बहुत सताये,
मेरा साजन मुझको दे गया धोका,
अब बाबुल घर जाऊं कैसे,
लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे.....


Friday, January 16, 2009

हुई दस्तक इस दिल में...

हुई दस्तक इस दिल में ,
जब आपका पैगाम आया ,


कितनी शामों से था इंतजार जिसका ,

वो दिलनशी आज शाम आया .


मरहबा सी खुशबु में ,

लिखा था नाम हमारी जुदाई का ,


खता हमने की मोहब्बत की ,उसने बेरुखी की ,

फिर भी हमपे बेवफाई का इल्जाम आया .


यूँ सुबह...

यूँ सुबह इन लबों पे नाम तेरा आ गया ,
जैसे मीठी इस भोर में कोहरा हो छा रहा ,

कितना हसीं है ये मंजर ,है चाँद जो छुप रहा ,
जाते जाते यह चाँद याद तेरी दिला रहा .

आई गई खुशी..

आई गई खुशी तेरे मेरे दरमियाँ ,
अजब खेल भी इश्क खिलाता है .


कि हम जाते आईने में ख़ुद को खोजते ,

कोई और हमे मिल जाता है .

जाने तू या जाने ना ...

जाने तू या जाने ना ...

माने तू या माने ना ...


है मेरी जिंदगी की डोर तू ,

शालीन शब् की भोर तू ,


है मेरे दिल में रहती तू ,जाने तू या जाने ना ...

प्यार बहुत करते है तुमसे ,माने तू या माने ना ...



एक मुस्कुराहट ने तेरी ,

है बदल दी शख्शियत मेरी ,


तकदीर ने जोड़ा है तुझको मुझसे ,जाने तू या जाने ना ...

हर लकीरों में है चेहरा तेरा ,माने तू या माने ना ...



करीब है तू या दूर है ,

इस जमाने से मजबूर है ,


तेरी पायलों की छम छम से हूँ जीता ,जाने तू या जाने ना ...

जुदाई में गिरे नम में हूँ जीता ,माने तू या माने ना ...


अदा बन गई....

अदा बन गई तेरी जिंदगी मेरे दिल की ,
जो शर्मा के मुश्कुराए आप .


कलमा हो जैसे फ़रिश्ते पढ़ने लगे ,

महफ़िल में जबसे आए आप .


है मुक़द्दर मेरा लिख गया....

है मुक़द्दर मेरा लिख गया ,तेरी हँसी मुश्कान से ,

लकीरों से है तेरा चेहरा बना ,है गुमशुदा हम ख़ुद की पहचान से .

असर कुछ इस कदर है हम पर तेरी खूबसूरती का कि,

भरी महफ़िल में लोग कहते है शायरी पढ़ रहा हूँ ,पर लब्ज़ निकलते है बस तेरे ही नाम से .


जो तकदीर में लिखा...

करते थे प्यार इतना उनसे ,कहते थे मांगो तो जान भी दे देंगे .

वो भी उस पल हमारे थे ,कहते थे हर पल तुम्हारे रहेंगे .

पर उन्हें इस गरीब से था बस खेल खेलना ,जुदाई के अश्क तो केवल यहीं बहेंगे .

अब तो मानते है कि ,जो तकदीर में लिखा है उसी से प्यार कर लेंगे .

नजर तेरे एक...

नजर तेरे एक दीदार को तरसती है ,
एक तुम हो जो ज़माने से डरते हो .


खुदा की कलम से लिखा प्यार अपना ,

बेवजह ही यूँ तुम वक्त की राह तकते हो .


फिर भी हमे है इस इश्क पे ,

ऐएत्बार इतना की जरूर हम ,


पा लेंगे तुम्हे ,चाहे जमीं पे ,

या चाहे आसमा में रहते हो ।


नाकाम साँसे मेरी ...

ख़ुद ही अपनी तस्वीर से भागता हूँ अब मैं ,
की बन गई है आईना यह आँखें तेरी .


समझना मुझको है तो बस अपने दिल से पूछो,

जिस के दम से है यह नाकाम साँसे मेरी .

इंतजार मोहब्बत का...

इंतजार मोहब्बत का ये दिल है कर रहा ,
एक तू है जो किसी और के ख्यालों में खोयी है


गर दर्द जानना है जुदाई का तो इन आंखों से पूछो,

जो तेरी याद में बिन हिसाब के रोई है


मुलाक़ात क्या ,दो बातें क्या ,

ये तो बस एक दीदार की आशिक है


एक पल में सौ बातें ये कह दे ,

सालों के गम में रो रो के जो पिरोई है .

अजब कहानी...

शायर क्या ,शायरी क्या ,
यह तो बस तेरे इश्क की मेहरबानी है ,


हम तो बस कलम लेके बैठे थे ,

दिल ने कह दी एक अजब कहानी है.

लिखा जो तेरा नाम..

लिखा जो तेरा नाम इन पन्नो पे तो ,
शायरी ख़ुद -ब -ख़ुद बन गई ,

हम तो बस रेत में हाथों को फेरा करते थे ,

ना जाने कैसे तस्वीर तेरी बन गई ,


लोग कहते की जरुर कोई हशीन होगी ,

जो शायरी में यूँ दर्द है ,


वो क्या जाने की वोह इतनी खुबशुरत है की जाने से ,

उनके ये जिंदगी भी थम गई .


फिरकत -ऐ -इश्क

इश्क तुझसे है महकता मेरे फूलों का ,
मत दूर जाना यह साँसे सूख जायेगी ,

बाती प्रेम की एक जला दो मेरे घर में तुम ,

मेरी जिंदगी भी एक रंग में सिमट जायेगी ,


माना चाहने वालों का तुम्हे इरफात है पड़ा ज़माने से ,

पर मेरी ग़ज़ल कुछ और ही रंग दिखायेगी ,


फिरक़त -ऐ -इश्क में जो लिखी थी पाक शायरी ,

वोह दर्द इस दिल का ख़ुद में ही रोके सुनाएगी .

कल यूँ ही...

कल यूँ ही महफ़िल में नाम तेरा उठ गया ,

तुम चले गए तो लगा चाँद जैसे हो छुप गया ।

मंजूर न था बिन आपके उन अजनबी के साथ होना ,

पर आके लौट आने से आपके ,जो पल था चला ,वो भी वही पे रुक गया .


करे इबादत हम किस से तेरी ....

एक नजर के अरमान है आपसे ,
जो उठे पलक तो नूर बरसे .


जो देख लो मुस्कुरा के एक बार तुम ,

तो तकदीर भी गुजरे इधर से .


हो भले चाह आपकी खुशबु की कितनी हमको ,

आप तो ना निकलो अपने घर से .


करे इबादत हम किस से तेरी ,

इस हुस्न को तो है हर कोई तरसे .


टूटे शीशों में...

टूटे शीशों में कई नक्स देखता हूँ मैं ,
एक तुम थे जो तोफहे को तोड़ गए.

हम तो एक तस्वीर के आशिक थे ,

शीशों में तुम हजारों छोड़ गए .

अदा हो जाते हो ख़त....

कहानी है बदल गई इस जिंदगी की ,
जब से दूर हो तुम गए ,


हर एक आहत पे लगे तुम आए ,

हर एक नूर में तुम दिखे ,


हँसी हो जाता समां ,

गर आंसूं की दुआ कुबूल हो जाती ,


और अदा हो जाते हो ख़त सारे ,

जो नाम हमने तेरे लिखे .


it's very darK

its very dark...

Its very dark,i can not see my own shadow.my mind is traveling with speed of light,but i feel its still very slow.
friends,family and neighbor,what are they ? they all r enemy,they are taking u away.
Feel yourself,ask yourself, before u go to sleep.there is a God inside u,try to find Him,by going very deep.
I am not a successful person,i m having a bad luck,this is not made for me,i am not going more for this fuck.
these two lines are two answers for a same,its not about win or loss,its about playing the game.

किसी दिन ...

पास आके मेरे ,अपनी बाहों में मुझको सजाओ ,किसी दिन .
सासों में मेरी हो बसी तुम ,अपनी आखों में मुझको बसो ,किसी दिन .
दूर रह कर भी कितने पास हो तुम ,आईने से निकल सामने तो आओ ,किसी दिन .
खुशबु छिपी मेरे प्यार के बागों में ,उस महक में नहाओ ,किसी दिन .
हमारा दिल हर पल है नाम तेरा लेता ,आपका दिल है क्या कहता बतलाओ ,किसी दिन .
तेरी तस्वीर है मेरी जिंदगी बन बैठी ,शर्म का आइना सामने से हटाओ ,किसी दिन.
है खुबसूरत जिनके अल्फाज़ इतने ,उन होठों हमको छू जाओ ,किसी दिन .
मैं शायर किस कामका आपके बिन ,प्यार से अपने एक शायरी लिख जाओ ,किसी दिन ........
आ जाओ किसी दिन ...