Wednesday, February 25, 2009

रोशनी की तलाश में ....

रोशनी की तलाश में है दर बदर भटका ये दिल ,

पर छुपा है सुकून ख़ुद उस की ही गहराई में ।

हमसफ़र तो छोड़ गया है रस्ते में ही ,

अब तो भागते है ख़ुद की परछाई से ।

आहत भर से लगता है वोह आयें है,

नूर लेकर जिंदगी भर का ,

पर खुली आँख हंशी ख्वाब से जब ,

देखा रोती थी वोह भी चुपचाप तन्हाई में .

शशि दिल से ...

यूँ दोस्ती हुई.....

हम चल रहे थे साथ ,वो चल रहे थे साथ .यूँ दोस्ती हुई ,
थी मंजिले करीब ,पर था दूरियों का एहसास .यूँ दोस्ती हुई ,
डर लग रहा था जुदाई का ,कर रहे थे मिन्नतें उस प्यार से ,
कुछ कदम पे ही था मोड़ उनका ,पर हो गई बरसात ,यूँ दोस्ती हुई,

तुम होती तो शाम होती....

तेरे ख्याल भर से महकी है ये महफ़िल ,की तुम आते तो शाम होती ,
नूर आता ,शमा जलती ,सुकून मिलता इस सूने मन को ,पास आओ ,थाम लो ,फ़ना कर दो इस दर्द से हम को ,
आसुओ से भीगी आँख एक ख्वाब है सजोती ,की तुम होती तो शाम होती .

तेरे जाने की तकलीफ तो है इस दिल को ,पर ये प्यार एक आस जगा देता है ,ये जाम तो बस एक रंग का मोहताज है ,नशा तो तेरे छूने पे ही मज़ा देता है ,
अश्को के मोती को काश तुम ,पैमानों संग पिरोती ,की तुम होती तो शाम होती ।

शशि दिल से...

ओ प्रिया ...

तुझे छूने को दिल करे ,तुझे पाने को दिल करे ,जो बात मेरे दिल में छिपी है ,वोह बताने को दिल करे ,ओ प्रिया ...ओ प्रिया ...
ये शब् नशीली ,ये शाम महकी ,तेरे ख्यालों से है ,तेरे लबों पे एक गीत लिख दूँ ,मेरे सवालों में है ,
तेरे हर एक नश्क़ को ,दुल्हन बनने का दिल करे ,जो बात मेरे दिल में छुपी है ,वो बताने का दिल करे ,ओ प्रिया ...ओ प्रिया ...
मैं सोचता हूँ वो कल हमारा ,जब साए करीब थे ,हम तुम में खोये ,तुम हम में खोये , नूर -ऐ -हशीन में ,
उस नूर के लाल से ,मांग सजाने का दिल करे ,जो बात मेंरे दिल में छुपी है ,वो बताने का दिल करे ,
ओ प्रिया ...ओ प्रिया ...

शशि दिल से .....

आपको अपना है मान लिया.....

आपको अपना है मान लिया बिन रिश्तों की पहचान के ,
ख्वाहिस सब हो जाएँगी पूरी मिल जाओ एक बार हमारे आरमान से ।
आंशुओं की बात है तो देख लो हम्हारे दिल में ,
हर मोती है झलकता बस आपके ही नाम से ।
शैल

Tuesday, February 24, 2009

टूटे दर्द पर दर्द अनोखा ......

मुझे ना मतलब दुनिया से अब ,हुई दीवानी भूल गई जग ,
तेरी जोगन बनके झूमू ,बिन सावन झूलों पे घूमू ,
मुझे कहे केरी हर साँस दीवानी ,यौवन ने यह लिखी कहानी ,
आँख को मूंदू तुझको पाऊं ,बिठा सखी से पाठ पड़ाऊँ,

मुझे लगा ये रोग अनोखा ,नीम हकीम लगे सब धोका,
बिस्तर पे जल्दी से जाऊं,तकिये को हर बात बताऊँ ,
दर्पण से करूँ शर्म मैं ,लगे फरक न जियन मरण में,
एक पैर की पायल भूलूं ,गर्म कडाई हाथ से छूलूं ,

बहकी बहकी बात करूँ मैं ,दर्पण से हर रात लडू मैं
बिन बारिश छतरी ले नाचूं, थाम नब्ज़ ये रोग ये नापूं ,
जाऊं पनघट घूम के नगरी ,लौटूं घर ले खाली गगरी ,
समझ से अपनी पार चली मैं ,एक कातिल पे दिल हार चली मैं

पर उसको मेरी फिक्र नही है ,उसका दिलबर और कहीं है ,
टूटे दिल मैं आँख भिगोऊँ ,हर पल उसकी आंस है जोहूँ ,
पलक सूज गई रात को जग जग ,पर उन्हें पड़े न फर्क न मतलब ,

हो गए आज तिन बरस रो रो के, आज भी उनको हर बात में सोचे,
मैं पागल मैं दीवानी मीरा ,कृष्ण नाम की थाम मंजीरा ,
अपनी बीती बात बताऊँ ,लिखे शशि गान ये गाऊँ,
हमने बस यह इश्क में सीखा ,टूटे दर्द पर दर्द अनोखा .

'शशि' दिल से ....