Thursday, January 20, 2011

तुम भी हो ...

एक रात वो थे बैठे ,और कह रहे थे की ...खफा है हम उनसे ...
और हम बस ये कह पाए की खफा तो तुम भी हो ....


जागे तो हम भी है ...जागे तो तुम भी हो ...
खफा जो मैं तुमसे हूँ ...खफा जो तुम भी हो ...

सजा ये कौन देगा ...तकलीफ ये किसको होगी ...
नमी में हम है ...नमी में तो तुम भी हो ....

आखिरी दर्द का एहसास सा है लगता तेरा दूर जाना ,
पास तो पर मैं हूँ तेरे ..और पास मेरे तुम भी हो ...

अब गर्म हवाएं इन साँसों की है दे रही दस्तक तुम को ...
सुनाई दे रही है हमे ये ..और रहे सुन तुम भी हो ...

बस अब करीब आ जाओ खामोश कर दो आहटे तकरार की ..
प्यार में तेरे मैं हूँ तेरे ..प्यार में मेरे तुम भी हो ...

शशि 'दिल से ...

Tuesday, January 18, 2011

तेरा हो जाता....

अश्क़ झलक उठते है इन आँखों से बेहिसाब,
जो मेरे शामियाने में है जिक्र तेरा हो जाता....

तू बेवफा न कद्र करती है संगेदिल ज़रा सा भी,
पास ज़रा जो आती तो हर अर्श तेरा हो जाता....

ये दिन कुछ ख़ास है ....

यह क्यों है मैं नहीं जानता ,पर बस कुछ ख़ास है इतना पता है ....
ये कविता ख़ास है...क्यूंकि ...
ये दिन कुछ ख़ास है...
ये दिन कुछ ख़ास है ....
जब करीब तेरे एक फूल गुलाब का आ जायेगा ,
दिल हो जायेगा खुश ,और तेरा ख्वाब मुश्कुरायेगा ,
दुआ में दिल से मेरे निकली एक आवाज है ...
कि हाँ ,
ये दिन कुछ ख़ास है ....

अरसे बाद ये दिन एक उम्मीद लेके आया है ,
कुछ पुराने रंग में एक साथ नया भी समाया है ,
कि अब मन्नते भी गुनगुनाती हर पल ये साज़ है ,
कि हाँ ,
ये दिन कुछ ख़ास है ....

कुछ आखिरी दिन के पल हो ; या ता -उम्र कि बात हो ,
खुशिया हो तेरे दामन में ;या उलझे से वो जस्बात हो ,
मैं हूँ ,था ,रहूँगा यही पे ,तुमपे जो हमको नाज़ है ,
कि हाँ ,
ये दिन कुछ ख़ास है ....

कभी ना आये जिंदगी में ग़म तेरे आँचल के करीब भी ,
तू हँसे ,ये दिन आये जो बार बार ,तो हम हो खुश -नसीब भी ,
ये क्यूँ लिखा ,कैसे ,ना पता ,बस दिल में छिपा एक राज़ है ,
कि हाँ ,
ये दिन कुछ ख़ास है ....

Thursday, January 6, 2011

वो साल आ जाता......


एक साल पहले वो साथ थी मेरे ,
एक साल पहले वो पास थी मेरे ,

अब छोड़ के चली गयी वो ,
दिल तोड़ के चली गयी वो ,

ह़र बार दिल में बस है ये सावाल आ जाता ,
समय फिर कुछ लौट जाता और वो साल आ जाता ,


अलाव तो है जल रहा ,और ये सर्दियां भी साथ है ,
पर दिल जले है भीतर जो ,उसका न कोई हिसाब है ,

कोशिश हूँ करता की दूर चला जाऊं उससे हर पर ,
पर बंद आँखों में है वो खूबसूरत ख्याल आ जाता ,
समय फिर कुछ लौट जाता और वो साल आ जाता ,

नए चेहरों में खोजता हूँ मैं बीता हुआ कल ,
आँखों में दर्द है और साँसों में एह्साह का दलदल ,

उतरता सा जा रहा हूँ मैं भीतर गहराई में रोक लूँ काश ,
बस सिमट जाती ये दुनिया मेरी जिंदगी में भूचाल आ जाता ,
काश ,ऐ काश ,
समय फिर कुछ लौट जाता और वो साल आ जाता ,

जिंदगी उसने छोड़ी क्यूँ पहले मुझसे ,
गिला खुदा से करे या करे शिकवा उनसे ,

हम तो अकेले पड़ गए एक आरजू लिए आँखों में ,
कि हिना रचेगी लाल रंग कि मेरे अंश के हाथों में ,

पर क्या नाराज़गी थी उस आकाश की मुझसे जो ,
जो खुशियाँ छीन के ले गए सारी मेरी मुझसे वो ,

वो मौत लौट जाती ,वो रंग लौट जाता ,
वो दर्द लौट जाता ,वो अंत लौट जाता ,

फिजा लौट आती ,महक लौट आती ,
ख़ुशी लौट आती ,चहक लौट आती ,

ये साल दूर जाता ,वो साल पास आता ,
वो साल लौटा तो ,वो शैल लौट आता ,


बड़े बिगड़ बैठे है हालात इस दिल के अब अन्दर ही अंदर ,
कुछ नहीं लौट सकता तो वापस बस वो हाल आ जाता ,
ऐ काश ,काश ,बस एक बार ,
समय फिर कुछ लौट जाता और वो साल आ जाता ,
वो साल आ जाता,