अश्क़ झलक उठते है इन आँखों से बेहिसाब,
जो मेरे शामियाने में है जिक्र तेरा हो जाता....
तू बेवफा न कद्र करती है संगेदिल ज़रा सा भी,
पास ज़रा जो आती तो हर अर्श तेरा हो जाता....
बड़े बदनाम है हम हो गए तेरे नाम को किताब पे उतार कर , और तुम हो कि आज भी मुह फेर के बैठे हो ,
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