
एक साल पहले वो साथ थी मेरे ,
एक साल पहले वो पास थी मेरे ,
अब छोड़ के चली गयी वो ,
दिल तोड़ के चली गयी वो ,
ह़र बार दिल में बस है ये सावाल आ जाता ,
समय फिर कुछ लौट जाता और वो साल आ जाता ,
अलाव तो है जल रहा ,और ये सर्दियां भी साथ है ,
पर दिल जले है भीतर जो ,उसका न कोई हिसाब है ,
कोशिश हूँ करता की दूर चला जाऊं उससे हर पर ,
पर बंद आँखों में है वो खूबसूरत ख्याल आ जाता ,
समय फिर कुछ लौट जाता और वो साल आ जाता ,
नए चेहरों में खोजता हूँ मैं बीता हुआ कल ,
आँखों में दर्द है और साँसों में एह्साह का दलदल ,
उतरता सा जा रहा हूँ मैं भीतर गहराई में रोक लूँ काश ,
बस सिमट जाती ये दुनिया मेरी जिंदगी में भूचाल आ जाता ,
काश ,ऐ काश ,
समय फिर कुछ लौट जाता और वो साल आ जाता ,
जिंदगी उसने छोड़ी क्यूँ पहले मुझसे ,
गिला खुदा से करे या करे शिकवा उनसे ,
हम तो अकेले पड़ गए एक आरजू लिए आँखों में ,
कि हिना रचेगी लाल रंग कि मेरे अंश के हाथों में ,
पर क्या नाराज़गी थी उस आकाश की मुझसे जो ,
जो खुशियाँ छीन के ले गए सारी मेरी मुझसे वो ,
वो मौत लौट जाती ,वो रंग लौट जाता ,
वो दर्द लौट जाता ,वो अंत लौट जाता ,
फिजा लौट आती ,महक लौट आती ,
ख़ुशी लौट आती ,चहक लौट आती ,
ये साल दूर जाता ,वो साल पास आता ,
वो साल लौटा तो ,वो शैल लौट आता ,
बड़े बिगड़ बैठे है हालात इस दिल के अब अन्दर ही अंदर ,
कुछ नहीं लौट सकता तो वापस बस वो हाल आ जाता ,
ऐ काश ,काश ,बस एक बार ,
समय फिर कुछ लौट जाता और वो साल आ जाता ,
वो साल आ जाता,
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