Friday, November 19, 2010

कागज से कौन सा रिश्ता....



यूँ अकेला मैं ,अनजान सा ,कलम लिए ,तेरे चेहरे की लकीरें हूँ खींचता ,
जब लकीरों ने मेरे हाथ की है दुश्मनी निभाई ,तो कागज से कौन सा रिश्ता ,


शशि ' दिल से.....

क्यों हंसी वो

क्यों हंसी वो याद आती है हर पहर ....

जब निशानी उसकी इन हांथो से भी मिटा बैठे है हम ....


शशि 'दिल से .....

ये रात बड़ी रंगीन होती है..........


ये रात बड़ी रंगीन होती है ,क्यूँ लोग ये कहते है ,

पर हमने जब देखा ,बिन तेरे ,अँधेरे में कुछ चमकते तारे ही दीखते है ,

हो सकता है तुम नहीं हो ,तो हर रंग ,बेरंग सा हो लग रहा ,

वरना आँखों से बहते अंशू में भी हर रंग जहाँ के बहते है .

Friday, February 5, 2010

आ जाओ करीब ...


आ जाओ करीब ...बदले नसीब ...

कुछ किताबें पूरी नहीं होती .आखरी पन्नो की तलाश हमें हमेशा बैचैन करती रहती है ..कुछ ऐसा ही है मेरा प्यार ,उनके लिए ,जिन्हें पास बुलाने के लिए ये बोल परेशान से ,ख़ामोशी में , जाने क्या क्या कह रहा है ...


आ जाओ करीब ...बदले नसीब ...

तेरी आँखों में , एक कहानी है ,तेरी हर बात कहती है ...तेरी हर बात कहती है ...
तेरे हर पल में ,जो रवानी है ,मेरे वो साथ रहती है ...मेरे वो साथ रहती है ...
आ जाओ करीब ,बदले नसीब ...

इन समंदर पे ,इन हवाओं से ,तेरा ही नाम लिखा है ...तेरा ही नाम लिखा है ...
मेरे एक कल की ,कुछ किताबों पे ,तेरा पैघाम लिखा है ...तेरा पैघाम लिखा है ...

ऐ हमनशीं ...आ जाओ करीब ...
आ जाओ करीब ...बदले नसीब ...

इस सफ़र में तू ,साथ ना हो जो ,गुल वीरान लगता है ...गुल वीरान लगता है ...
हर चेहरे में ,तेरी परछाईं ,जग अनजान लगता है ...जग अनजान लगता है ...

ऐ दिलनशीं ...आ जाओ करीब ...
आ जाओ करीब ...बदले नसीब ...

हुस्न का आशिक ,तेरा हर कोई ,मुझे तेरा दिल प्यारा है ...मुझे तेरा दिल प्यारा है ...
मेरे इस दिल ने ,मेरी चाहत से ,तेरा हर रंग निहारा है ...तेरा हर रंग निहारा है ...

ऐ महजबीं ...आ जाओ करीब ...
आ जाओ करीब ...बदले नसीब ...

SHASHI'DIL SE....