
ये रात बड़ी रंगीन होती है ,क्यूँ लोग ये कहते है ,
पर हमने जब देखा ,बिन तेरे ,अँधेरे में कुछ चमकते तारे ही दीखते है ,
हो सकता है तुम नहीं हो ,तो हर रंग ,बेरंग सा हो लग रहा ,
वरना आँखों से बहते अंशू में भी हर रंग जहाँ के बहते है .
बड़े बदनाम है हम हो गए तेरे नाम को किताब पे उतार कर , और तुम हो कि आज भी मुह फेर के बैठे हो ,
वो कहते हैं कि कैसे लिख लेते हो तुम बातें दिल की इन पन्नो पे.... मैं कह देता हूँ कि बस जी लेता हूं मैं बातें दिल की इन पन्...
ला-जवाब" जबर्दस्त!!
ReplyDelete.शब्दों को चुन-चुन कर तराशा है आपने ...प्रशंसनीय रचना।
shukriya sanjay ji..its always been nyc 2 hav sm appraisal..warna kitabon ke paano ka koi mol nahi hota na...
ReplyDeletethanx alot