Thursday, March 12, 2009

मुलाक़ात......

यह कविता मैंने एक तस्वीर को देखते हुए लिखी थी ....और भगवान् से एक मुलाकात कर आया...उम्मीद है पसंद आएगी ....

बैठा दिया यूँ सोचने , दे दो नक्श मेरे सामने ,

जैसे मैं बिखरा रंगों में,या हूँ निकला कश्ती थामने

कैसी कहानी मै लिखूं ,हूँ मैं कवि किस काम का ,

कविता है वोह नाम की ,हासिल न हो जिसमे अंजाम सा ,

है दिख यह कस्ती मुझे ,समंदर से है जो लड़ रही ,

पानी में जैसे आग हो,नीचे से जैसे तप रही,

मैं देखता हूँ ख़ुद को वह ,नीला जहाँ सा दिख रहा ,

पानी में नाव ऐसे बह रही ,मस्ती में जैसे फूल खिल रहा ,

फ़िर लड़ रहा था दो पल बाद मैं ,ख़ुद की कलि के टूटने से,

सागर भी था प्यार में,चाहा था मुझको मेरे डूबने में ,

कुछ ही पलों के दौरान मैं ,अतीत के सौ पन्ने पड़े ,

सोचा की क्या क्या है काम बाकी ,है कुछ लोग मेरे बल पर खड़े ,

उस पल हुआ कुछ अँधेरा वहां ,फ़िर रंगीन आसमान हो गया ,

दिखने लगा वो इन्द्रधनुष ,जैसे मैं मौत में खो गया ,

वोह रौशनी थी मुझे कह रही ,इस तूफ़ान तू स्वीकार कर ,

लड़ बढ़ और काट पानी को ,इस दर्द को तू पार कर ,

क्या होगा जो तू हारेगा ,पहले ही मौत क्यूँ खोजता है ,

एक बार मिल जायें दर्द ,कोई बात नही ,कोशिश ये तू सौ बार कर ,

शायद तुझे दिख रहा ,किनारा न अब कोई दूर है,

ताक़त तुझे है दे रहा प्यार उसका ,माथे का जिसके तू सिन्दूर है ,

कैसे बताऊँ उस रौशनी को ,मुझको किनारा कोई न दिख रहा ,

झुकती सी जा रही ये नाव ये,हूँ हलचल में पानी की मिल रहा ,

न संभल रही ताक़त से अब ,रक्षा की ये ताबीज किन,

बाँधी जिसे उसे सिन्दूर ने है ,है पानी में मिलती हर चीज सी ,

कोशिश को कर ,क्यूँ थक रहा ,देखा है कल बस भगवान् ने ,

कह दूसरी साँस से तू ,आ पहली को तू थामने ,

अब अंत के करीब हूँ ,जैसे इश्वर से हूँ मैं मिल गया ,

था आशमा ना कभी इतना थमा , जितना था उस दिन दिख रहा ,

पानी अब बिल्कुल शांत है ,किनारा भी है आस पास में ,

कश्ती बयानी उस रौशनी में ,पानी जलाया उस आग ने ,

एक पल में है अब आँख खुली, पाता हूँ, लिखता ख़ुद को लोगों में,

चेहरे से सबके खो गया मैं ,या खो गया मैं अपनी सोचों में ,

मैं शुक्रिया तुम्हारा करता हूँ ,तुमने है सच वो बात की ,

मर के तो सब उससे मिलते है ,जी कर के मैंने मुलाक़ात की ,

जीतना और हारना कविता में ,बेईमानी की बात लगती है ,

लिखते ही उससे मिल गया ,अब कविता ये मेरी सजती है ,

.शशि'दिल से ....

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