Friday, April 6, 2012

मेरे नाम को अनसुना सा


कभी बंद आँखों से पढ़ लेते थे, तुम मेरे साये की आवाज को भी..
और आज भरी महफ़िल में, मेरे नाम को, अनसुना सा कर देते हो..
शशि' दिल से ..

2 comments:

  1. another awesome piece after a long time...loved it as always...Welcome back...:):)

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  2. @br!nDle... thnx for welcoming.. n THANKS ALOT FOR LOVING THIS again :)

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